सरकार का फैसला ऐतिहासिक है.. उसका स्वागत होना चाहिए.. लेकिन बहुत सारे लोग अतिउत्साह में कश्मीर की जमीन और वहाँ की लड़कियों को हथियाने वाले जोक्स फॉरवर्ड करके पूरा छिछालेदर मचाये हैं... यार यही गलती कर देते हो तुम लोग.. कश्मीर को अपना मान रहे हो तो वहाँ के लोगों से ऐसे मिलो जैसे कोई अपना लम्बे अरसे बाद मिल रहा हो... वो घर से निकले तो उन्हें हौसला हो कि उनके आसपास उनके चाहने वाले लोग रहते हैं... उन्हें यह एहसास होना चाहिए कि मुख्यधारा से कटने पर बड़ा नुकसान हुआ है उनका... किसी के घर जाकर न बेटा, अगर उसकी जमीन और जवान लड़की के अलावा तुम्हें कुछ और नज़र नहीं आता है तो तुम आदमी से जानवर बन चुके हो और तुम्हारी इस करतूत पर सामने वाला भी प्रतिक्रिया के लिए मजबूर होगा तो तुम्हें बहाना मिल जायेगा, ये कहने का.. 'ये साले, होते ही हैं आतंकवादी.. 'अबे वो होते नहीं हैं.. तुम्हारी घिनौनी प्रतिक्रियाएँ उन्हें होने पर मजबूर कर देती हैं..... बाकी दोज़ख को जन्नत बनाने का मौका मिला है तो भुना लो... काहे को हुतियापा मचाये हो?
Wednesday, 14 August 2019
इमरान के बयान का मतलब
इमरान खान अपने भाषण ये सिद्ध करने का प्रयत्न कर रहा था कि उसे भारत से नहीं बल्कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सोच से निपटना है... उसको भी पता है कि फ़ायदा कैसे उठाना है... भारत में कुछ लोगों को अपने हक़ में कैसे करना है... भारतीय मुस्लिम समुदाय को कैसे भड़काना है... देश की कमजोरी से पड़ोसी भी वाक़िफ़ हो जाए तो लड़ाई लम्बी हो जाती है.. मैं नहीं समझ पा रहा हूँ कि 370 को हटाने से हमारे देश में ऐसा बवाल क्यों मचा है... कर्फ्यू,सेना की तैनाती, इंटरनेट बंद करना तो कोई बड़ी बात नहीं है... ऐसा अमूमन होता रहा है... अबकी बार ऐसा क्या है जो पचाने में दिक्कत हो रही है... कश्मीरी आवाम की ये शुभचिंतक जमात कहाँ थी अबतक... पिछले ७० वर्षों से जो दंश वो झेल रहे हैं... उससे बुरा तो कुछ भी नहीं हो सकता... दो देशों की लड़ाई में हमेशा पिसता रहा है ये कश्मीर...अब अगर उसे किसी एक ओर रहकर रहना हो तो दिक्कत क्या है.... रही बात भाषा, बोली, संस्कृति की तो उसका जवाब दक्षिण भारत है... वो भारत का हिस्सा भी रहा है और अपनी मौलिकता भी बचाए रखा है... हमारे देश में कितने विदेशी आक्रांता आये तो क्या हमारी सांस्कृतिक विरासत खत्म हो गई?ऐसा कुछ भी नहीं है... ऐसे ही डर पैदा करके उन्माद फैलाया जाता रहा है... विभिन्न धर्मों, जातियों, राष्ट्रों में.... हमारे देश के तथाकथित बुद्धिजीवी समाज को ये गंदा खेल अब बंद कर देना चाहिए... आने वाली पीढ़ियों के लिए ये खेल खतरनाक नज़र आता दिख रहा है... इससे कुछ नहीं हासिल होने वाला है... मान लिजिए कश्मीर फिर उसी स्थिति पहुँच गया या फिर पाकिस्तान, दुनिया में यह संदेश पहुँचने में कामयाब रहा कि यह कदम कश्मिरीयो के दमन के लिए भारत की दक्षिणपंथी सरकार का फासीवादी कदम है.... तो फिर क्या होगा?क्या कश्मीर मसले को फिर से पश्चिमी देशों के पाले में डालकर हम कश्मीरी जनता और सेना को सरकारों के राजनैतिक खेल का हिस्सा बनाकर ऐसे ही खेलते रहेंगे ये खूनी खेल... जहाँ बच्चों के हाथ में पत्थर और सेना के हाथ में पैलेट गन हो... आप टेलीविजन पर झड़प की खबरें सुनते हुए कबतक देखना चाहते हैं निर्दोषों की लाशें?
बाकी देश की आज़ादी के दिन का जश्न मनाईये और याद करने की कोशिश करिये कि वास्तव में गुलामी कितनी खतरनाक और दुःखदाई होती है... गुलाम कश्मीर को आज़ाद भारत बनने दीजिये.... विचार बदल सकते हैं... इतिहास नहीं..!!
!!!! जय हिंद!!!
बाकी देश की आज़ादी के दिन का जश्न मनाईये और याद करने की कोशिश करिये कि वास्तव में गुलामी कितनी खतरनाक और दुःखदाई होती है... गुलाम कश्मीर को आज़ाद भारत बनने दीजिये.... विचार बदल सकते हैं... इतिहास नहीं..!!
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