सरकार का फैसला ऐतिहासिक है.. उसका स्वागत होना चाहिए.. लेकिन बहुत सारे लोग अतिउत्साह में कश्मीर की जमीन और वहाँ की लड़कियों को हथियाने वाले जोक्स फॉरवर्ड करके पूरा छिछालेदर मचाये हैं... यार यही गलती कर देते हो तुम लोग.. कश्मीर को अपना मान रहे हो तो वहाँ के लोगों से ऐसे मिलो जैसे कोई अपना लम्बे अरसे बाद मिल रहा हो... वो घर से निकले तो उन्हें हौसला हो कि उनके आसपास उनके चाहने वाले लोग रहते हैं... उन्हें यह एहसास होना चाहिए कि मुख्यधारा से कटने पर बड़ा नुकसान हुआ है उनका... किसी के घर जाकर न बेटा, अगर उसकी जमीन और जवान लड़की के अलावा तुम्हें कुछ और नज़र नहीं आता है तो तुम आदमी से जानवर बन चुके हो और तुम्हारी इस करतूत पर सामने वाला भी प्रतिक्रिया के लिए मजबूर होगा तो तुम्हें बहाना मिल जायेगा, ये कहने का.. 'ये साले, होते ही हैं आतंकवादी.. 'अबे वो होते नहीं हैं.. तुम्हारी घिनौनी प्रतिक्रियाएँ उन्हें होने पर मजबूर कर देती हैं..... बाकी दोज़ख को जन्नत बनाने का मौका मिला है तो भुना लो... काहे को हुतियापा मचाये हो?
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