ये महामारी एक आपदा है। अचानक आन पड़ी है। दुनिया की कोई भी सरकार इसके लिए तैयार नहीं थी। जिन देशों की सुख, सुविधा और शिक्षा का हवाला देकर भारत को घेरते थे आप, वो देश भी इस महामारी से त्रस्त हैं। आप कह रहे हैं कि सरकार ने सही इंतज़ाम नहीं किये, कोई रोडमैप नहीं बनाया, अचानक लॉकडाउन का फैसला ले लिया, गरीब लोगों की ज़िन्दगी तबाह हो रही है। ज़रा सोचिए कि कौन सी सरकार एकाएक ऐसा कर सकती है, कौन देश चाहता है कि ऐसी आपदा हमारे ऊपर आए और हमें इसके लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। अगर लॉकडाउन का फैसला अचानक नहीं लिया गया होता तो पैसे वालों के घर एक-दो महीने की चीजें पहले ही भर ली गई होतीं। जिन गरीबों का आप हवाला दे रहे हैं, उनकी स्थिति और ज्यादा बदतर हो गई होती। जमाखोरी और कालाबाज़ारी यहाँ के लोगों के खून में है, जिसको मौका, पैसा और पावर मिला वो लग गया अपने जुगाड़ में। भ्रष्टाचार से त्रस्त इस देश में कैसे आप एकदम अचानक से सबको कर्मठ और ईमानदार बना देंगे। कोई भी सरकार नहीं चाहती कि उसके कार्यकाल में ऐसा दुर्दिन देखना पड़े। ये महामारी वर्तमान सरकार के लिए एक चुनौती लेकर आयी है। दर'असल मैं भी अपने घर से दूर फंसा हूँ। प्रयागराज में तैयारी करने वाले छात्रों का जीवन वैसे तो हमेशा ही अभावों में बीतता है। इस लॉकडाउन में हालत और खराब है। हम लोग राशन घर से लाते हैं। खरीदने भर के पैसे ही नहीं मिलते। महीने के आखिरी दिन चल रहे हैं। सामानों के बढ़ते दामों और किल्लत की वजह से मानसिक और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। परीक्षाएं टल गईं। जान पहचान के लोग गाँव चले गए। एकदम अकेले और निराश पड़े हैं यहाँ। प्रयागराज के लोगों का खर्चा पानी हम तैयारी कर रहे छात्रों पर टिका होता है। हम उनके लिए धंधा हैं। किराना वाला, मकान मालिक, सब्जी वाला कोई भी हमारे साथ सहानुभूति नहीं रखता। सबको हमें चूसना ही है और ऐसे समय में तो और मज़ा आ रहा है उनको हमारी मजबूरी का फ़ायदा उठाने में। घर वाले परेशान हैं, चाह कर भी मदद नहीं कर सकते। बैंक तक पहुँच नहीं पा रहे हैं, मोबाइल बैंकिंग उनके बस का काम नहीं है। गाँव में भी तो लॉकडाउन है, घर का खर्च ही जैसे तैसे चल जाए, वही बहुत है। ये बताकर मैं आपकी सहानुभूति नहीं बटोरना चाहता। मेरा बस इतना कहना है कि हम भी बहुत बुरे दौर से गुजर रहें हैं। ऐसा नहीं कि मलाई काट रहे हैं और फाइव स्टार से पोस्ट फेंककर गरीबों के ऊपर मार रहें हैं। सबके लिए मुश्किल घड़ी है। मुफ़्तखोरी की आदत हमें परेशान कर रही है, हमें खतरे का अंदाज़ा नहीं है, हम तो बस राहत पैकेज के इंतजार में बैठे हैं। अपना अपना हिस्सा जोड़ रहे हैं। सरकार को ये दे देना चाहिए, वो दे देना चाहिए, ये फ्री कर देना चाहिए, उसमें कटौती कर देनी चाहिए। जैसे इस महामारी से बस सरकार ही मरेगी, आप तो सुरक्षाकवच पहन कर बैठे हैं। बस मिलता जाये, आप रखते जाएं। सुबह से लेकर रात तक खाली कोसने, गरियाने और हास्य व्यंग्य में कट रही है आपकी। ऊँट के मुँह में जीरा, अस्पताल की खस्ता हालत, भुखमरी की शिकार जनता, यही सब शेयर करके काट रहें हैं लॉकडाउन। ये सारी समस्याएं तो हमेशा से रहीं हैं इस देश में। अब तक आप कहाँ सो रहे थे और सो ही रहे थे तो इक्कीस दिन और सोये रहते। समस्याएं सबको पता है। समाधान दीजिये। जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को टैग करके अपना समाधान ट्वीट करिये। नहीं सुन रहे हैं तो बार-बार करिये। हम सभी संकट से गुजर रहें हैं। काहें हौसला तोड़ने पर लगे हैं। पैदल निकल पड़ने वाले लोगों को क्या निकलने से पहले समस्या का अंदाज़ा नहीं था, जहाँ रह रहे थे वहीं रहते तो मर जाते फिर इस बात की क्या गारंटी है कि इस लॉकडाउन में दो ढ़ाई हज़ार किलोमीटर की पैदलयात्रा करके बच जायेंगे। ऐसे में जब होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट बंद हैं तो रास्ते में क्या खायेंगे? ये ऐसे लोग हैं जो बिना सोचे समझे ही आजतक अपनी ज़िंदगी का निर्णय लेते आए हैं, इसी का नतीजा है कि आज यहाँ आकर फंसे हैं। गाँव पहुँच जाने से सबकुछ ठीक तो नहीं हो जायेगा। वहाँ भी अभाव में जी रहे थे तभी तो शहरों में मजदूरी करने के लिए विवश थे। अब वहाँ जाकर भी परिवार के लिए बोझ ही बढ़ायेंगे।वहाँ कौन सी फैक्ट्री चल रही है जो इनको खर्चा पानी दे देगी। अगर एक दो लोग इस महामारी को लेकर गाँव पहुँच गए तो यकीन मानिए इसको रोकना दूभर हो जायेगा। कोसने से अच्छा है कि हौसला बढ़ायें आस पास के लोगों का। जिस प्रकार से सक्षम हैं शारीरिक, आर्थिक और मानसिक मदद पहुँचायें लोगों को। हम सब जंग में शामिल हैं, हम सभी ये लड़ाई लड़ रहे हैं। रोना-पिटना मत मचाईये। नहीं लड़ना है तो एसी अॉन करिये, चद्दर तानिये और सो जाइए। 21 दिन बाद बचे रहेंगे तो शोक मना लीजिएगा कि ससुरा इस महामारी में भी कुछ फ्री में नहीं मिला। खाली फोकट में बीत गया इतना संकट भरा दिन। चीन ने कमजोर वायरस पैदा किया, ये सरकार तो ज़िन्दा है अभी। तौबा-तौबा ऐसे कैसे बच गए इतने लोग। खुदा कहर बरपा, मुझे अभी और जोर से रोना है..!!
Friday, 27 March 2020
Thursday, 26 March 2020
वायरस के अंधकार में भविष्य पर प्रकाश
अमेरिका में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहें हैं। लोगों में भय और आक्रोश है। क्योंकि ट्रंप बाज़ार को पूरी तरह बंद करने के पक्ष में नहीं है। ज्यादातर शक्तिशाली देश ऐसा ही कर रहे हैं। रूस भी इसी राह पर चल रहा है। दुनिया के बहुत सारे देशों ने स्वयं को पूरी तरह बंद कर लिया है। कोरोना के बारे में पूरी और सही जानकारी के साथ-साथ लोगों को मेडिकल सेक्टर में कच्चे माल की सख्त आवश्यकता है। अमेरिका खुद ही इस महामारी से जूझ रहा है तो दूसरों की सहायता कैसे करेगा? चीन में स्थिति लगातार सुधर रही है। वो धीरे धीरे अपना बाज़ार खोल रहा है। चीन के पास कोरोना से सम्बन्धित बहुत सारी जानकारियां हैं। वह पूरी दुनिया को ज्यादातर सेक्टर में कच्चामाल उपलब्ध करवाता है। ऐसे में सारे देश उसी से मदद मागेंगे। वह सबका लीडर बनके उभरेगा। बिना किसी युद्ध के पूरे विश्व की सबसे बड़ी महाशक्ति भी बन सकता है। यही कारण है कि अमेरिका और रूस जैसे देश अपनी बाज़ारों को पूरी तरह बंद करने से कतरा रहे हैं। लेकिन ये जिद पर ज्यादा दिन तक टिक नहीं पायेंगे क्योंकि वहाँ भी संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहें हैं। ऐसे में उनके ऊपर भी दबाव रहेगा। अगर ये सारी गणित सही बैठती है भविष्य में तो ट्रंप चिल्ला चिल्लाकर जो कई दिनों से पूरी दुनिया को आगाह कर रहे थे चीन के बारे में, उसे महज़ मज़ाक और जहालत का हिस्सा नहीं माना जायेगा।कहीं ये वायरस वास्तव में किसी षड्यंत्र का हिस्सा तो नहीं है?
Tuesday, 24 March 2020
कोरोना वायरस को रोकने के लिए 21 दिनों तक भारत बंद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए 21 दिनों की बंदी की घोषणा की है. पीएम मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा, ''आज आधी रात से पूरा देश बंद रहेगा. यह भारत, सभी भारतीयों, आप और आपके परिवार को बचाने के लिए है. सभी सड़कें और आसपास के इलाक़े पूरी तरह से बंद रहेंगे.अगले 21 दिनों तक घर से बाहर निकलना भूल जाइए. अगर आपने लक्ष्मण रेखा लांघी तो अपने घरों में वायरस आमंत्रित करेंगे. 21 दिन की बंदी लंबी लग रही है लेकिन सबको सुरक्षित रखने का यही तरीक़ा है. अगर आप 21 दिन नहीं मानेंगे तो हमारा देश, आपके परिवार 21 साल पीछे चले जाएंगे.''
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में लोगों से अपील की है कि दिन रात मेहनत करके हमारी सेवा में तत्पर चिकित्सकों, सफाईकर्मियों, पुलिसकर्मियों एवं मीडियाकर्मियों के लिए प्रार्थना करें। साथ ही केन्द्र सरकार की तरफ से अस्पतालों में सुविधा बढ़ाने, आइसोलेशन वार्ड, वेंटिलेटर, आईसीयू बेड और दवाईयों के लिए 15 हजार करोड़ की सहायता राशि की घोषणा की गई है। मोदी ने सभी राज्यों से अनुरोध किया है कि लोगों को इस महामारी से बचाने को ही प्राथमिकता दें। उन्होंने लोगों से अफ़वाहों और अंधविश्वासों से दूर रहने का आग्रह किया है।लोगों को आगाह किया है कि बिमारी के लक्षणों के दौरान बिना डाक्टरों की सलाह के कोई भी दवा न लें। उन्होंने लोगों से धैर्य और अनुशासन बनाये रखने को कहा और साथ ही यह आश्वासन भी दिया, "सरकार सभी आवश्यक वस्तुओं को प्रत्येक व्यक्ति तक लगातार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। "
Monday, 23 March 2020
दौर-ए-महामारी
सोशलमीडिया के दौर में सूचनाओं की बाढ़ आ गई है। हर आदमी की टाइमलाईन कोरोना की जानकारियों से भरी पड़ी है। सभी विशेषज्ञ बने बैठे हैं। डबल्यू एच ओ, स्वास्थ्य मंत्रालय और चिकित्सकों का संदर्भ देकर तमाम अफ़वाहें फैलाई जा रहीं हैं। हर मिनट के आँकड़े पेश किए जा रहे हैं। तथ्य और भ्रम में अंतर नहीं हो पा रहा है। जिसको जो मिल रहा है, चेंप दे रहा है। कोई लूसेंट का हवाला दे रहा है, कोई ट्रंप का ट्वीट, कोई इटली और यूरोप की भयावह स्थिति बता रहा है, कोई चीन का उदाहरण दे रहा है, न्यूज़ चैनल पर कोरोना वायरस की दवाईयां बताई जा रहीं हैं, मलेरिया और सॉर्स की दवाईयां रिकमेंड की जा रहीं हैं। डर और खौफ का माहौल पैदा किया जा रहा है। अरे रुक जाओ महारथियों। थमों थोड़ी देर। घर में बैठे बुजुर्गों और बच्चों की तरफ देखो एकबार। सतर्क और सुरक्षित रहने का वक्त है। डरा करके जान मत लो। कुछ लोग दिनरात मेहनत कर रहे हैं। बहुत सारे लोग ठीक हो रहें हैं। घर बैठे हो तो अपने पसंद के काम करो। घर परिवार से बातें करो। अपने बच्चों की भवनाएं समझों। बुजुर्गों को थोड़ा और प्यार दो। टीवी बंद करके नात-रिश्तेदारों का हालचाल लो। लोगों में सकारात्मकता फैलाओ। भरोसा पैदा करो। अपनों को घरों में रोकने की कोशिश करो। साफ सफाई करो। गीत संगीत सुनो। पढ़ो लिखो। इधर उधर भागने से अच्छा है। कुछ पल ठहर के देखो। सारी ज़िन्दगी भागते भागते कहाँ आकर पहुँच गए हो। प्रकृति के आगे कितने बेबस हो। क्या मूल्य है जीवन भर के संग्रहों का। रूको। देखो और शांति से कुछ क्षण चिंतन मनन करो। बेवजह बेवकूफ़ी मत करो आभासी दुनिया के महान योद्धाओं..!!
कोरोना के चलते देश के 75 जिलों में लॉकडाउन
जनता कर्फ्यू की सफलता और कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते सरकार ने 22 राज्यों के 75 जिलों में लॉकडाउन घोषित कर दिया है। इन जिलों में संक्रमण के मामले आ चुके हैं और तेजी से बढ़ भी रहे हैं। जिसके मद्देनज़र सरकार ने यह फैसला किया है। देश में संक्रमितों की संख्या 423 पर पहुँच गई है। मरने वालों की संख्या अब सात हो गई है जबकि 24 लोग अबतक ठीक हो चुकें हैं। सरकार हर हाल में कोरोना वायरस को तीसरे चरण यानि कम्युनिटी ट्रांसमिशन के दौर में जाने से रोकना चाहती है। राज्यों के बीच चलने वाली परिवहन सेवाओं और सभी यात्री ट्रेनों का संचालन रोक दिया गया है। यह स्वतंत्र भारत का अबतक का सबसे बड़ा शटडाउन है। जरूरी कामों को छोड़कर घर से बाहर जाने की मनाही है। केवल रोजमर्रा के जीवन में काम आने वाली जरूरी सेवाओं को ही चालू रखा गया है। अस्पताल, किराना, डेयरी, खाद्यान्न, फल, सब्जी, चिकित्सा, मीडिया, गैस एजेंसी, बैंक एवं एटीएम आदि खुले रहेंगे। कुछ राज्यों जैसे-बंगाल, बिहार, तेलंगाना, महाराष्ट्र, झारखंड, पंजाब, ओडिशा, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, चंडीगढ़, जम्मू कश्मीर और लद्दाख में 31 मार्च तक पूर्ण लॉकडाउन का ऐलान कर दिया गया है।
Saturday, 21 March 2020
भारत में कोरोना वायरस और जनता कर्फ़्यू
भारत एक विकासशील देश है। यहाँ अभी भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। स्वास्थ्य, सुरक्षा और शिक्षा के क्षेत्र में हम दुनिया के तमाम देशों से बहुत पीछे हैं। भ्रष्टाचार और इच्छाशक्ति की कमी के कारण सरकार और जनता के बीच अविश्वास पैदा हुआ है। बेरोजगारी और साम्प्रदायिकता ने लोगों में आक्रोश पैदा किया है। वैश्वीकरण और उदारवाद ने देश में मध्यमवर्ग को बढ़ाने का काम तो किया लेकिन इसी के साथ रूढ़िवादी और प्रतिक्रियावादी समाज का भी उद्भव हुआ। सरकारी एजेंसियों के आँकड़ों और वैश्विक संस्थाओं के आँकड़ों में बड़ा अंतर दिखाई पड़ता है। देश की साक्षरता और सोशलमीडिया की सक्रियता के कारण आम जनता तक दोनों आँकड़े आसानी से पहुँच जाते हैं। उन आँकड़ों पर बहस और अफ़वाहों के चलते भी लोगों में अविश्वास पैदा हुआ है। मतलब ये है कि सरकार और जनता के बीच एक गहरी खाईं पनप रही है। ऐसे दौर में किसी वैश्विक महामारी की चपेट में आना देश के लिए चुनौतिपूर्ण है।
चीन के वुहान शहर के हुबेई प्रांत से शुरू हुआ कोराना वायरस आज दुनिया के लगभग १८६ देशों तक पहुँच चुका है। विकसित देशों में शुमार यूरोपियन और अमेरिकन कन्ट्रीज़ में भी इस वायरस ने तबाही मचा रखी है। दुनिया के तमाम देश,जो अपने अस्पताल, विज्ञान , सुविधा, सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए जाने जाते थे, इस महामारी के आगे बेबस दिख रहे हैं। सबसे बड़ी वैश्विक महाशक्ति संयुक्त राज्य अमेरिका के लोग स्वास्थ्य बीमा के अभाव में जी रहे हैं और इलाज के लिए पैसे नहीं जुटा पा रहे हैं। इटली में ऐसी स्थिति है कि बुजुर्गों को मरने के लिए छोड़ दिया जा रहा है, केवल युवाओं को ही बुनियादी स्वास्थ्य सुविधा पहुँच पा रही है। सभी देशों ने अपनी सीमायें बंद कर रखी हैं। अनेकों आयोजनों को स्थगित किया जा चुका है। जापान में होने वाले समर ओलंपिक पर भी खतरा मंडरा रहा है। शेयर बाजार धड़ाम से गिर गया है। कच्चे तेलों के दामों में अभूतपूर्व कमी आई है। अभी तक इस वायरस का कोई टीका नहीं खोजा गया है। कोरोना वायरस का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है और पूरी मानव जाति इसके सामने बेबस नज़र आ रही है। लोग अपने घरों में बंद हैं। व्यापार ठप्प होते जा रहे हैं। दुनिया जैसे थमती जा रही है।
इन देशों के मुकाबले भारत की जनसंख्या बहुत बड़ी है और सुविधाएं बहुत कम। हमारी भौगोलिक स्थिति भी इनसे भिन्न है। हमारी संस्कृति, सभ्यता, रीति रिवाज और रहन सहन भी इनसे भिन्न है। विविधताओं से भरे इस देश में कोरोना ने दस्तक दे दी है। अब सरकार, बुद्धिजीवी वर्ग, व्यापारी वर्ग और सोशलमीडिया के महारथियों को चेत जाना चाहिए। मज़ाक, लापरवाही और गलती की गुंजाइश नहीं बची है। सभी को एकसाथ मिलकर इस महामारी का सामना करना चाहिए। देश में कोरोना अभी दूसरे स्टेज में है, तीसरे स्टेज में पहुँचने से पहले हमें इसे रोकना होगा। हमारे पास अस्पताल और कुशल चिकित्सकों की भारी कमी है। ऐसे में एक ही उपाय है-बचाव। लोगों को जागरूक करके इस बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है। जनता कर्फ्यू का ऐलान एक सार्थक पहल है। हम सभी को उसपर अमल करना चाहिए। शहरों में बिमारी तेजी से फैल रही है। इसके कारण तमाम पढ़ी लिखी और जागरूक जमात गाँवों की ओर पलायन कर रही है। हमें ध्यान रखना चाहिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का और भी अभाव है। ऐसे में गाँवों को लौटे शिक्षित लोगों का कर्तव्य है कि वो अपने आसपास के लोगों को जागरूक करें। उन्हें इस महामारी के बारे में बताएं। नौजवान टुकड़ी बनाकर लोगों को सफाई करने के लिए प्रेरित करें। उन्हें ज्यादा से ज्यादा घर में रहने की सलाह दें। बुजुर्गों और बच्चों की विशेष देखभाल के लिए आग्रह करें। लोगों के अंदर डर और भ्रम न पनपने दें। उन्हें समझाएँ कि बचाव ही एकमात्र उपाय है। खुद को भी सुरक्षित रखें। लम्बी यात्रा करके गाँव पहुँचने वाले लोग कुछ दिन घर में ही रहें। जुकाम, बुखार की स्थिति में भीड़भाड़ वाली जगहों में जाने से बचें। अगर शहर में ही रहकर सुरक्षित रहना सम्भव हो तो कुछ दिन गाँव न ही जायें। भारत गाँवों में बसता है। गाँवों को सुरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है। वहाँ केवल बचने या फिर बीमारी फैलाने न जाएँ। गाँवों को भी आपकी जरूरत है। छोटे छोटे प्रयास करके गाँवों को इस बीमारी से बचाने में सहयोग करें। यह डरने या संदेह करने का समय नहीं है। एकजुट प्रयास करें, एक दूसरे का सहयोग करें। हमने तमाम चुनौतियों का सामना किया है। हमने मानवता के बल पर कई लड़ाईयां फ़तेह की हैं। हम कोरोना को भी हरा देंगे। बस सतर्क रहें, सहयोग करें और सुरक्षित रहें।
~अभिषेक सिंह
जनता कर्फ्यू के पहले तैयार दिखे आम लोग
सरकार द्वारा रविवार को जनता कर्फ्यू लगाये जाने के ऐलान के बाद लोगों ने शनिवार को खूब खरीददारी की।प्रयागराज में देर शाम तक लोग मेडिकल स्टोर, किराने की दुकानों और सब्जियों के ठेले पर जरूरी सामान खरीदते हुए दिखे। प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम सम्बोधन में जनता कर्फ्यू लगाने की बात कही। उसके बाद शहर में गाँवों से आये प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र बड़ी संख्या में घर की तरफ रवाना हो गए। शहर के ज्यादातर चौराहे सुनसान दिखे। लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। शाम को बड़ी संख्या में लोग बाहर निकले और अपने जरूरी सामानों को खरीदते हुए नज़र आये।
Friday, 20 March 2020
निर्भया कांड के दोषियों को फांसी
दिल्ली के तिहाड़ जेल में सवेरे 5.30 बजे चारों को फांसी हुई।जिसके बाद तिहाड़ जेल के निदेशक संदीप गोयल ने मुकेश सिंह, विनय शर्मा, अक्षय कुमार सिंह और पवन गुप्ता की जांच कर उन्हें मृत घोषित किया। इन चारों के शवों को तिहाड़ जेल से दिल्ली के एक सरकारी अस्पताल ले जाया गया है,जहां इनका पोस्टमॉर्टम किया जाना है।दोषियों को फांसी मिलने पर लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोषियों की फांसी को न्याय की जीत बताया है।उन्होंने कहा, "महिलाओं का सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित किया जाना ज़रूरी है।हमारी नारी शक्ति ने हर क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन किया है।आज हमें मिलकर ऐसे राष्ट्र का निर्माण करना है जो महिला सशक्तीकरण पर आधारित हो और जहां समानता और अवसरों पर ज़ोर हो।"
महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा, "अब लोगों को पता चलेगा कि भले की सज़ा मिलने में देरी हो लेकिन उन्हें गुनाह करने पर सज़ा ज़रूर मिलेगी।"निर्भया के पिता बद्रीनाथ सिंह ने कहा, "देश में महिलाओं के लिए ऐसा क़ानून बने जिससे लोगों को लंबा इंतज़ार न करना पड़े।"निर्भया के मां आशा देवी कहा, "मैं न्यायपालिका, मीडिया, राष्ट्रपति और आप सबका शुक्रिया अदा करती हूं।सात साल का संघर्ष आज अंजाम तक पहुंचा।आज का दिन हमारे बच्चियों और महिलाओँ के नाम है जब निर्भया को न्याय मिला।"
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