सोशलमीडिया के दौर में सूचनाओं की बाढ़ आ गई है। हर आदमी की टाइमलाईन कोरोना की जानकारियों से भरी पड़ी है। सभी विशेषज्ञ बने बैठे हैं। डबल्यू एच ओ, स्वास्थ्य मंत्रालय और चिकित्सकों का संदर्भ देकर तमाम अफ़वाहें फैलाई जा रहीं हैं। हर मिनट के आँकड़े पेश किए जा रहे हैं। तथ्य और भ्रम में अंतर नहीं हो पा रहा है। जिसको जो मिल रहा है, चेंप दे रहा है। कोई लूसेंट का हवाला दे रहा है, कोई ट्रंप का ट्वीट, कोई इटली और यूरोप की भयावह स्थिति बता रहा है, कोई चीन का उदाहरण दे रहा है, न्यूज़ चैनल पर कोरोना वायरस की दवाईयां बताई जा रहीं हैं, मलेरिया और सॉर्स की दवाईयां रिकमेंड की जा रहीं हैं। डर और खौफ का माहौल पैदा किया जा रहा है। अरे रुक जाओ महारथियों। थमों थोड़ी देर। घर में बैठे बुजुर्गों और बच्चों की तरफ देखो एकबार। सतर्क और सुरक्षित रहने का वक्त है। डरा करके जान मत लो। कुछ लोग दिनरात मेहनत कर रहे हैं। बहुत सारे लोग ठीक हो रहें हैं। घर बैठे हो तो अपने पसंद के काम करो। घर परिवार से बातें करो। अपने बच्चों की भवनाएं समझों। बुजुर्गों को थोड़ा और प्यार दो। टीवी बंद करके नात-रिश्तेदारों का हालचाल लो। लोगों में सकारात्मकता फैलाओ। भरोसा पैदा करो। अपनों को घरों में रोकने की कोशिश करो। साफ सफाई करो। गीत संगीत सुनो। पढ़ो लिखो। इधर उधर भागने से अच्छा है। कुछ पल ठहर के देखो। सारी ज़िन्दगी भागते भागते कहाँ आकर पहुँच गए हो। प्रकृति के आगे कितने बेबस हो। क्या मूल्य है जीवन भर के संग्रहों का। रूको। देखो और शांति से कुछ क्षण चिंतन मनन करो। बेवजह बेवकूफ़ी मत करो आभासी दुनिया के महान योद्धाओं..!!
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