Saturday, 21 March 2020

भारत में कोरोना वायरस और जनता कर्फ़्यू


   भारत एक विकासशील देश है। यहाँ अभी भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। स्वास्थ्य, सुरक्षा और शिक्षा के क्षेत्र में हम दुनिया के तमाम देशों से बहुत पीछे हैं। भ्रष्टाचार और इच्छाशक्ति की कमी के कारण सरकार और जनता के बीच अविश्वास पैदा हुआ है। बेरोजगारी और साम्प्रदायिकता ने लोगों में आक्रोश पैदा किया है। वैश्वीकरण और उदारवाद ने देश में मध्यमवर्ग को बढ़ाने का काम तो किया लेकिन इसी के साथ रूढ़िवादी और प्रतिक्रियावादी समाज का भी उद्भव हुआ। सरकारी एजेंसियों के आँकड़ों और वैश्विक संस्थाओं के आँकड़ों में बड़ा अंतर दिखाई पड़ता है। देश की साक्षरता और सोशलमीडिया की सक्रियता के कारण आम जनता तक दोनों आँकड़े आसानी से पहुँच जाते हैं। उन आँकड़ों पर बहस और अफ़वाहों के चलते भी लोगों में अविश्वास पैदा हुआ है। मतलब ये है कि सरकार और जनता के बीच एक गहरी खाईं पनप रही है। ऐसे दौर में किसी वैश्विक महामारी की चपेट में आना देश के लिए चुनौतिपूर्ण है।
    चीन के वुहान शहर के हुबेई प्रांत से शुरू हुआ कोराना वायरस आज दुनिया के लगभग १८६ देशों तक पहुँच चुका है। विकसित देशों में शुमार यूरोपियन और अमेरिकन कन्ट्रीज़ में भी इस वायरस ने तबाही मचा रखी है। दुनिया के तमाम देश,जो अपने अस्पताल, विज्ञान , सुविधा, सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए जाने जाते थे, इस महामारी के आगे बेबस दिख रहे हैं। सबसे बड़ी वैश्विक महाशक्ति संयुक्त राज्य अमेरिका के लोग स्वास्थ्य बीमा के अभाव में जी रहे हैं और इलाज के लिए पैसे नहीं जुटा पा रहे हैं। इटली में ऐसी स्थिति है कि बुजुर्गों को मरने के लिए छोड़ दिया जा रहा है, केवल युवाओं को ही बुनियादी स्वास्थ्य सुविधा पहुँच पा रही है। सभी देशों ने अपनी सीमायें बंद कर रखी हैं। अनेकों आयोजनों को स्थगित किया जा चुका है। जापान में होने वाले समर ओलंपिक पर भी खतरा मंडरा रहा है। शेयर बाजार धड़ाम से गिर गया है। कच्चे तेलों के दामों में अभूतपूर्व कमी आई है। अभी तक इस वायरस का कोई टीका नहीं खोजा गया है। कोरोना वायरस का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है और पूरी मानव जाति इसके सामने बेबस नज़र आ रही है। लोग अपने घरों में बंद हैं। व्यापार ठप्प होते जा रहे हैं। दुनिया जैसे थमती जा रही है।
     इन देशों के मुकाबले भारत की जनसंख्या बहुत बड़ी है और सुविधाएं बहुत कम। हमारी भौगोलिक स्थिति भी इनसे भिन्न है। हमारी संस्कृति, सभ्यता, रीति रिवाज और रहन सहन भी इनसे भिन्न है। विविधताओं से भरे इस देश में कोरोना ने दस्तक दे दी है। अब सरकार, बुद्धिजीवी वर्ग, व्यापारी वर्ग और सोशलमीडिया के महारथियों को चेत जाना चाहिए। मज़ाक, लापरवाही और गलती की गुंजाइश नहीं बची है। सभी को एकसाथ मिलकर इस महामारी का सामना करना चाहिए। देश में कोरोना अभी दूसरे स्टेज में है, तीसरे स्टेज में पहुँचने से पहले हमें इसे रोकना होगा। हमारे पास अस्पताल और कुशल चिकित्सकों की भारी कमी है। ऐसे में एक ही उपाय है-बचाव। लोगों को जागरूक करके इस बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है। जनता कर्फ्यू का ऐलान एक सार्थक पहल है। हम सभी को उसपर अमल करना चाहिए। शहरों में बिमारी तेजी से फैल रही है। इसके कारण तमाम पढ़ी लिखी और जागरूक जमात गाँवों की ओर पलायन कर रही है। हमें ध्यान रखना चाहिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का और भी अभाव है। ऐसे में गाँवों को लौटे शिक्षित लोगों का कर्तव्य है कि वो अपने आसपास के लोगों को जागरूक करें। उन्हें इस महामारी के बारे में बताएं। नौजवान टुकड़ी बनाकर लोगों को सफाई करने के लिए प्रेरित करें। उन्हें ज्यादा से ज्यादा घर में रहने की सलाह दें। बुजुर्गों और बच्चों की विशेष देखभाल के लिए आग्रह करें। लोगों के अंदर डर और भ्रम न पनपने दें। उन्हें समझाएँ कि बचाव ही एकमात्र उपाय है। खुद को भी सुरक्षित रखें। लम्बी यात्रा करके गाँव पहुँचने वाले लोग कुछ दिन घर में ही रहें। जुकाम, बुखार की स्थिति में भीड़भाड़ वाली जगहों में जाने से बचें। अगर शहर में ही रहकर सुरक्षित रहना सम्भव हो तो कुछ दिन गाँव न ही जायें। भारत गाँवों में बसता है। गाँवों को सुरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है। वहाँ केवल बचने या फिर बीमारी फैलाने न जाएँ। गाँवों को भी आपकी जरूरत है। छोटे छोटे प्रयास करके गाँवों को इस बीमारी से बचाने में सहयोग करें। यह डरने या संदेह करने का समय नहीं है। एकजुट प्रयास करें, एक दूसरे का सहयोग करें। हमने तमाम चुनौतियों का सामना किया है। हमने मानवता के बल पर कई लड़ाईयां फ़तेह की हैं। हम कोरोना को भी हरा देंगे। बस सतर्क रहें, सहयोग करें और सुरक्षित रहें।

~अभिषेक सिंह

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