जो हाल राजनेताओं ने देश की कर रखी है, वही हाल छात्र नेताओं ने शिक्षण संस्थानों कर रखी है। राजनीति बस राज करने की नीति है।मारपीट कर, लगड़-झगड़ कर, फूट डालकर, रो गाकर, भेष बदलकर, दंगा करवाकर, जला-बुझाकर चाहे जैसे बस जीतना है। हमने जीतने वाले को इतनी शाबाशी और हारने वाले की इतनी बेज्जती कर देने का प्रचलन बनाया है कि आदमी मर जायेगा लेकिन हारना नहीं चाहेगा। जिस देश में मज़ाक उड़ाना बुद्धिमत्ता की निशानी हो, गाली-गलौज अभिव्यक्ति की आज़ादी, तोड़ना-फोड़ना संवैधानिक अधिकार...वहाँ ट्वीट-ट्वीट खेलना ही मुनासिब है। सड़कों पर बस गुंडे ही दिखेंगे क्योंकि शरीफों ने दरवाजे बंद कर रखे हैं। खेलो, सभी लोग खेलो, मानव जाति का स्वभाव है कि वह समय-समय पर आपस में लड़कर-मर कर संतुलन बनाए रखती है...बहुत ज्यादा दिनों तक शांति बर्दाश्त नहीं होती इनको....कभी साम्यवादी, कभी पूँजीवादी, कभी आतंकवादी, कभी धर्म रक्षक तो कभी देश, संस्कृति, सभ्यता के नाम पर खून होता रहेगा, लोग मारे जाते रहेंगे और चलता रहेगा मेरा ट्वीट, तेरा ट्वीट...मेरी सरकार, तेरी सरकार......!!
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