Wednesday, 15 April 2020

वैश्विक महामारी में काम आयेगी एक सच्ची मुस्कान

मुस्कान में जबरदस्त शक्ति होती है।जिसे मुस्कराने का हुनर मालूम है, उसके आसपास के लोग अच्छा महसूस करते हैं। कई बार हमारे बीच फैली उदासी, मायूसी, गुस्सा और अकेलेपन को बस एक सच्ची मुस्कान की दरकार होती है। चित्रों में हम देखते हैं कि देवता हमेशा मुस्कराते और शांत नज़र आते हैं। राक्षस गुस्से में, बेचैनी में और असंतुष्ट नज़र आते हैं। राम के चरित्र को और भी प्रभावशाली बनाती है, उनके चेहरे पर फैली वो मुस्कान। वो मुस्कान उनके साथ लड़ने वालों को हौसला देती है, घबराने से रोकती है और दुश्मन के लिए ख़ौफ़ पैदा करती है।
 आज हम सभी घरों में बंद हैं, बेबस हैं। अपनी इच्छाओं पर लगाम लगा रहे हैं। कुछ लोग अपने घर से दूर हैं, किसी की नौकरी खतरे में है, एक अनदेखा दुश्मन हमें चारो खाने चित्त कर दिया है। हमें नहीं पता क्या होगा, कब होगा, सबकुछ पहले जैसा होगा या नहीं, आगे सब बेहतर होगा  या फिर बदतर। कई सवालों के जबाब नहीं मिल रहें हैं, पूरी मानवजाति अनिश्चितता में जी रही है। ऐसे में हमें सीखना होगा मुस्कराना। हमें अपने लोगों को यकीन दिलाना होगा कि अभी आशा है, उम्मीद कायम है। मेरी तरह निपट अकेले हैं और घबरा रहे हैं तो खुद को आइने सामने मुस्कराते हुए देखिए। झूठी नहीं, सच्ची मुस्कान। ये काम करता है। फ़िलहाल मैंने तो इसे आजमाया है। पिछले एक महीने से एकदम अकेले एक कमरे में बंद होकर जीने के लिए मैंने यही रास्ता चुना है। सोशलमीडिया पर लोगों की एक्टिविटी देखकर निराश मत होईये। अन्य महापुरुषों की तरह क्रिएटिव नहीं हैं तो भी कोई बात नहीं। फेसबुक पर डालने लायक खाना नहीं बना रहे हैं, मीम्स में हाथ तंग है, ढ़ाई बीघे की पोस्ट लिखकर ज्ञान नहीं बघारा जा रहा है, कोरोना, कोरेंटाइन, आइसोलेशन पर कविता, कहानी नहीं लिख पा रहे हैं, महान लेखकों की अद्वितीय किताबों में मन नहीं लग रहा है, नेटफ्लिक्स पर फिल्म नहीं देखा जा रहा है, कोई बात नहीं। ख़ुद को माफ़ कर दीजिए। आपसे जो हो पा रहा है, वही करिये। कोई जबरदस्ती नहीं, कोई दबाव नहीं। समाज के हिसाब से ज़िन्दगी जीते ही आयें हैं, आगे भी जीना ही पड़ेगा। लेकिन ये वक़्त सिर्फ आपका है। जो कुछ भी मन का लगे, वही करिये।शांत रहिये और हमेशा मुस्कराते रहिये।जैसा कि नक्श लायकपुरी का एक शेर है-
"ज़िन्दगी  में  सदा  मुस्कराते  रहो,
 फासले कम करो दिल मिलाते रहो।"

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