ये महामारी एक आपदा है। अचानक आन पड़ी है। दुनिया की कोई भी सरकार इसके लिए तैयार नहीं थी। जिन देशों की सुख, सुविधा और शिक्षा का हवाला देकर भारत को घेरते थे आप, वो देश भी इस महामारी से त्रस्त हैं। आप कह रहे हैं कि सरकार ने सही इंतज़ाम नहीं किये, कोई रोडमैप नहीं बनाया, अचानक लॉकडाउन का फैसला ले लिया, गरीब लोगों की ज़िन्दगी तबाह हो रही है। ज़रा सोचिए कि कौन सी सरकार एकाएक ऐसा कर सकती है, कौन देश चाहता है कि ऐसी आपदा हमारे ऊपर आए और हमें इसके लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। अगर लॉकडाउन का फैसला अचानक नहीं लिया गया होता तो पैसे वालों के घर एक-दो महीने की चीजें पहले ही भर ली गई होतीं। जिन गरीबों का आप हवाला दे रहे हैं, उनकी स्थिति और ज्यादा बदतर हो गई होती। जमाखोरी और कालाबाज़ारी यहाँ के लोगों के खून में है, जिसको मौका, पैसा और पावर मिला वो लग गया अपने जुगाड़ में। भ्रष्टाचार से त्रस्त इस देश में कैसे आप एकदम अचानक से सबको कर्मठ और ईमानदार बना देंगे। कोई भी सरकार नहीं चाहती कि उसके कार्यकाल में ऐसा दुर्दिन देखना पड़े। ये महामारी वर्तमान सरकार के लिए एक चुनौती लेकर आयी है। दर'असल मैं भी अपने घर से दूर फंसा हूँ। प्रयागराज में तैयारी करने वाले छात्रों का जीवन वैसे तो हमेशा ही अभावों में बीतता है। इस लॉकडाउन में हालत और खराब है। हम लोग राशन घर से लाते हैं। खरीदने भर के पैसे ही नहीं मिलते। महीने के आखिरी दिन चल रहे हैं। सामानों के बढ़ते दामों और किल्लत की वजह से मानसिक और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। परीक्षाएं टल गईं। जान पहचान के लोग गाँव चले गए। एकदम अकेले और निराश पड़े हैं यहाँ। प्रयागराज के लोगों का खर्चा पानी हम तैयारी कर रहे छात्रों पर टिका होता है। हम उनके लिए धंधा हैं। किराना वाला, मकान मालिक, सब्जी वाला कोई भी हमारे साथ सहानुभूति नहीं रखता। सबको हमें चूसना ही है और ऐसे समय में तो और मज़ा आ रहा है उनको हमारी मजबूरी का फ़ायदा उठाने में। घर वाले परेशान हैं, चाह कर भी मदद नहीं कर सकते। बैंक तक पहुँच नहीं पा रहे हैं, मोबाइल बैंकिंग उनके बस का काम नहीं है। गाँव में भी तो लॉकडाउन है, घर का खर्च ही जैसे तैसे चल जाए, वही बहुत है। ये बताकर मैं आपकी सहानुभूति नहीं बटोरना चाहता। मेरा बस इतना कहना है कि हम भी बहुत बुरे दौर से गुजर रहें हैं। ऐसा नहीं कि मलाई काट रहे हैं और फाइव स्टार से पोस्ट फेंककर गरीबों के ऊपर मार रहें हैं। सबके लिए मुश्किल घड़ी है। मुफ़्तखोरी की आदत हमें परेशान कर रही है, हमें खतरे का अंदाज़ा नहीं है, हम तो बस राहत पैकेज के इंतजार में बैठे हैं। अपना अपना हिस्सा जोड़ रहे हैं। सरकार को ये दे देना चाहिए, वो दे देना चाहिए, ये फ्री कर देना चाहिए, उसमें कटौती कर देनी चाहिए। जैसे इस महामारी से बस सरकार ही मरेगी, आप तो सुरक्षाकवच पहन कर बैठे हैं। बस मिलता जाये, आप रखते जाएं। सुबह से लेकर रात तक खाली कोसने, गरियाने और हास्य व्यंग्य में कट रही है आपकी। ऊँट के मुँह में जीरा, अस्पताल की खस्ता हालत, भुखमरी की शिकार जनता, यही सब शेयर करके काट रहें हैं लॉकडाउन। ये सारी समस्याएं तो हमेशा से रहीं हैं इस देश में। अब तक आप कहाँ सो रहे थे और सो ही रहे थे तो इक्कीस दिन और सोये रहते। समस्याएं सबको पता है। समाधान दीजिये। जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को टैग करके अपना समाधान ट्वीट करिये। नहीं सुन रहे हैं तो बार-बार करिये। हम सभी संकट से गुजर रहें हैं। काहें हौसला तोड़ने पर लगे हैं। पैदल निकल पड़ने वाले लोगों को क्या निकलने से पहले समस्या का अंदाज़ा नहीं था, जहाँ रह रहे थे वहीं रहते तो मर जाते फिर इस बात की क्या गारंटी है कि इस लॉकडाउन में दो ढ़ाई हज़ार किलोमीटर की पैदलयात्रा करके बच जायेंगे। ऐसे में जब होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट बंद हैं तो रास्ते में क्या खायेंगे? ये ऐसे लोग हैं जो बिना सोचे समझे ही आजतक अपनी ज़िंदगी का निर्णय लेते आए हैं, इसी का नतीजा है कि आज यहाँ आकर फंसे हैं। गाँव पहुँच जाने से सबकुछ ठीक तो नहीं हो जायेगा। वहाँ भी अभाव में जी रहे थे तभी तो शहरों में मजदूरी करने के लिए विवश थे। अब वहाँ जाकर भी परिवार के लिए बोझ ही बढ़ायेंगे।वहाँ कौन सी फैक्ट्री चल रही है जो इनको खर्चा पानी दे देगी। अगर एक दो लोग इस महामारी को लेकर गाँव पहुँच गए तो यकीन मानिए इसको रोकना दूभर हो जायेगा। कोसने से अच्छा है कि हौसला बढ़ायें आस पास के लोगों का। जिस प्रकार से सक्षम हैं शारीरिक, आर्थिक और मानसिक मदद पहुँचायें लोगों को। हम सब जंग में शामिल हैं, हम सभी ये लड़ाई लड़ रहे हैं। रोना-पिटना मत मचाईये। नहीं लड़ना है तो एसी अॉन करिये, चद्दर तानिये और सो जाइए। 21 दिन बाद बचे रहेंगे तो शोक मना लीजिएगा कि ससुरा इस महामारी में भी कुछ फ्री में नहीं मिला। खाली फोकट में बीत गया इतना संकट भरा दिन। चीन ने कमजोर वायरस पैदा किया, ये सरकार तो ज़िन्दा है अभी। तौबा-तौबा ऐसे कैसे बच गए इतने लोग। खुदा कहर बरपा, मुझे अभी और जोर से रोना है..!!
👍👍👍
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